चार पक्की, पांचवीं पर पसीना! बिहार में राज्यसभा का असली खेल शुरू

Ajay Gupta
Ajay Gupta

राजधानी Patna में नामांकन की आखिरी तारीख सिर पर है, लेकिन अब तक किसी दल ने आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया। सियासत का यह सन्नाटा दरअसल अंदरखाने चल रही सौदेबाजी का शोर है। पांच सीटों पर चुनाव है, लेकिन असली लड़ाई सिर्फ एक सीट की है।

नंबर गेम का असली गणित

बिहार विधानसभा में मौजूदा ताकत के आधार पर तस्वीर साफ दिखती है।

एनडीए खेमे में Bharatiya Janata Party – 89, Janata Dal (United) – 85, Lok Janshakti Party (Ram Vilas) – 19, हम – 5, उपेंद्र कुशवाहा गुट – 4 कुल मिलाकर 202 विधायक।

विपक्षी महागठबंधन Rashtriya Janata Dal – 25, Indian National Congress – 6, लेफ्ट – 3, आईआईपी – 1 कुल 35 विधायक।

राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 प्रथम वरीयता वोट जरूरी हैं। चार सीटों के लिए 164 वोट चाहिए एनडीए के पास यह आराम से है।

पांचवीं सीट? यहां से राजनीति शुरू होती है।

पांचवीं सीट का पेच

202 वोटों में से 164 निकाल दीजिए, तो 38 बचते हैं। जीत के लिए 41 चाहिए। मतलब कम से कम 3 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन। नजरें किस पर हैं? Bahujan Samaj Party के एक विधायक, All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के 5 विधायक छोटे दलों और संभावित असंतुष्टों पर यहीं से सियासी जोड़-तोड़ की फाइलें खुलती हैं।

विपक्ष की रणनीति: हार कर भी लड़ेंगे

संख्या कम होने के बावजूद Rashtriya Janata Dal ने मैदान छोड़ने का इरादा नहीं दिखाया। चर्चा है कि Tejashwi Yadav खुद राज्यसभा की रेस में उतर सकते हैं।

रणनीति साफ है विपक्षी वोटों को एकजुट करो, AIMIM और बसपा को साथ लाओ, और पांचवीं सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दो। लेकिन अगर विपक्ष दो उम्मीदवार उतार देता है, तो वोटों का बंटवारा खुद उसके लिए जाल बन सकता है।

NDA का क्लीन स्वीप मिशन

एनडीए की सोच सिर्फ चार सीटों पर संतोष करने की नहीं है। सूत्रों की मानें तो पांचवीं सीट पर भी बीजेपी उम्मीदवार उतारने की तैयारी है।

क्रॉस वोटिंग का एक्स फैक्टर

बिहार की राजनीति में क्रॉस वोटिंग कोई नई बात नहीं। अगर कांग्रेस या छोटे दलों में असंतोष हुआ, तो समीकरण बदल सकता है। लेकिन फिलहाल गणित एनडीए के पक्ष में है, मनोविज्ञान विपक्ष के।

चार तय, पांचवीं पर असली जंग

चार सीटों पर एनडीए की बढ़त स्पष्ट, पांचवीं सीट पर 3 वोटों का खेल, विपक्ष एकजुट हुआ तो मुकाबला दिलचस्प, बंटवारा हुआ तो NDA का क्लीन स्वीप।

बिहार की राज्यसभा का यह चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं यह सियासी धैर्य, रणनीति और मनोवैज्ञानिक दबाव की परीक्षा है।

इस होली खुश रहो इतना कि पड़ोसी भी पूछे, राज़ क्या है? सभी को हैप्पी होली

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